हेयं दुःखमनागतम् ॥ १६॥
भविष्य के दुःख से बचा जा सकता है

वास्तु कॉम्बो - I, II और III

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"वास्तु का प्राचीन विज्ञान" श्रृंखला वास्तु शास्त्र की गहन शिक्षाओं पर प्रकाश डालती है, जिसमें भूमि के चयन से लेकर वास्तु-संबंधी बारीकियों तक, जिसमें ग्रहों की स्थिति और ऊर्जा संबंधी विचार शामिल हैं, का व्यापक अन्वेषण प्रस्तुत किया गया है। भगवान विश्वकर्मा और अन्य संतों द्वारा लिखित प्राचीन ग्रंथों में निहित, इन ग्रंथों का उद्देश्य वैदिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत और व्यावसायिक स्थानों को रूपांतरित करना है। डॉ. जयश्री ओम बोराड और सिद्धार्थ बोराड जैसे विशेषज्ञों द्वारा लिखित, जो अपनी अकादमिक और व्यावहारिक विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं, ये पुस्तकें पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक समझ के साथ जोड़ती हैं, जिससे वास्तु सिद्धांतों को ज्योतिष, अंकशास्त्र और आयुर्वेद जैसे विविध क्षेत्रों में सुलभ बनाया जा सके। यह श्रृंखला, जिसमें 'समरंगन सूत्रधार' जैसे मूलभूत ग्रंथों के अनुवाद शामिल हैं, वास्तु शास्त्र के शाश्वत सिद्धांतों को उजागर करना जारी रखती है, जो ऊर्जावान रूप से संतुलित वातावरण बनाने में अपने व्यवस्थित दृष्टिकोण और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के साथ पाठकों को समृद्ध करती है।

Specifications:

  • Author ‏ : ‎ डॉ. जयश्री ओम
  • Publisher ‏ : ‎ वैदिक वास्तु जीवन
  • Edition ‏ : ‎ पहला
  • Language ‏ : ‎ अंग्रेज़ी
  • Country : भारत
  • Release Date : 31 जनवरी, 2023
  • Pages ‏ : ‎ 760
  • Format : पेपरबैक
  • Size ‏ : ‎ 12 × 10 × 2 सेमी
  • Printing ‏ : ‎ श्वेत-श्याम
  • Cover Finish ‏ : ‎ मैट
  • Cover Material ‏ : ‎ 300 जीएसएम आर्ट कार्ड
  • Item Weight ‏ : ‎ 800 ग्राम
  • Packaging ‏ : ‎ सिकुड़न-लिपटा और 3-प्लाई नालीदार बॉक्स में पैक किया गया

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